एनडीए के डिनर में शामिल नहीं होंगे उपेंद्र कुशवाहा, बढ़ सकती है सीटों पर खींचतान

 NDA की डिनर पार्टी में शामिल नहीं होंगे केन्द्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा

बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है? ये सवाल इसलिए उठे हैं क्योंकि बिहार की राजधानी पटना में बीजेपी ने NDA के घटक दलों के लिए एक डिनर पार्टी रखी है. ये पार्टी आज यानी गुरुवार रात में होने वाली है. खबर है कि बिहार में NDA के अहम सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा इसमें सम्मिलित नहीं होंगे. ये अभी तक साफ नहीं हुआ है कि आखिर उपेंद्र कुशवाहा इस रात्रि भोज में शामिल क्यों नहीं हो रहे हैं? इसको लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं.

वहीं जेडीयू के श्याम रजक ने कहा कि जेडीयू बिहार में अहम रोल निभा रही है. हम अब तक 25 सीटों पर चुनाव लड़ते नजर आए हैं. उन्हें हमें 25 सीटें देनी ही होंगी, कम सीटें लेने का कोई प्रश्न ही नहीं है. अगर NDA नीतीश कुमार का फायदा चाहती है तो उन्हें जेडीयू के साथ न्याय करना होगा. 

बता दें कि बीते शनिवार को ही केंद्र में बिहार से बीजेपी के अन्य सहयोगी और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था कि लगातार हो रहे उपचुनाव में हार की वजह को जानने के लिए एनडीए की बैठक होनी चाहिए और साथ ही बीजेपी को अपने सहयोगियों के साथ बैठ कर सीटों के बंटवारे पर बात करना चाहिए.

पिछले चुनाव में लोजपा पांच और रालोसपा ने तीन सीटों पर जीत हासिल की थी. अगर सीटिंग फार्मूले पर हिस्सेदारी की बात होती है, तो जदयू को नौ से अधिक सीट मिलना असंभव है, जबकि जदयू की बात अगर सुनी जाएगी तो भाजपा को अपने आठ सांसदों की बलि देनी पड़ सकती है. ऐसे में 15-15 सीटों पर भाजपा, पांच सीटों पर लोजपा, तीन सीटों पर रालोसपा और एक-एक सीट अरुण कुमार और पप्पू यादव जैसों के लिए छोड़ा जा सकता है. 

जानकारों का कहना है कि ऐसे किसी फार्मूले पर भाजपा शायद ही राजी हो. यह सच है कि उपचुनाव के बाद भाजपा कमजोर हुई है, लेकिन इतनी भी कमजोर नहीं हुई है कि वो अपने घटक दलों के आगे घुटने टेक दे. अपनी ताकत को साधने के लिए ही भाजपा प्रमुख अमित शाह ने सहयोगी दलों से संपर्क साधने का अभियान चलाया है. 

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