कल बन रहा है अचूक संयोग, 14 साल बाद शनि अमावस्या

 बेहद ख़ास है कल होने वाली शनिश्चरी अमावस्या, 14  साल बाद शनि अमावस्या

चैत्र मास में शनिवार को शुभ योग में शनिश्चरी अमावस्या का योग 14 साल बाद बन रहा है. इससे पहले चैत्र मास में शनैश्चरी अमावस्या का योग 20 मार्च 2004 को बना था. ज्ञात हो आगे यह योग 7 साल बाद 29 मार्च 2025 को बनेगा. 

माना जाता है इस शुभ योग में स्नान, दान और पूजा कई गुना अधिक फलदायी रहेगी. अमावस्या शुक्रवार को शाम लगभग 6 बजे से शनिवार की शाम लगभग 6.35 बजे तक होगी. अमावस्या पर शनि-मंगल की युति के अलावा पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, नाग करण, कुंभ राशि का चंद्रमा सहित कई योग बन रहे है जो अब 7 साल बाद शनि अमावस्या पर बनेंगे.

इस अमावस्या पर अगर आप दान पुन्य करेंगे और इसके साथ उपाए करेंगे तो ये आपको बहुत शुभ फल देगी. 

इस शनि अमावस्या पर साढ़ेसाती और ढय्या वाले लोग ये उपाए करें:
काली गाय को बूंदी के लड्डू खिलाएं.
शनिदेव को तिल के तेल का दीपक लगाएं.
नदी में नहाएं.
शनि मंदिर में जाकर तेल का दान करें.
काली उड़द और लोहे का दान भी दे सकते हैं
.
सरसों के तेल का दान करें.
अंधविद्यालय, अनाथालय या वृद्धाश्रम में दान करें.
उड़द की दाल के पकौड़े, काले गुलाबजामुन एवं इमरती कुत्तों और कौओं को खिलाएं.
अपने शारीरिक वजन के बराबर कच्चा कोयला शनिवार को बहाएं.

इस शनि अमावस्या पर अन्य लोग ये उपाय अपनाये: 
सुबह जल्दीि उठें और सूर्योदय के वक्त सूर्य को जल ज़रूर चढ़ाएं.
पीपल के पेड़ की पूजा करें.
हनुमानजी की मूर्ति के सामने बैठकर तेल का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें.
मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं.
सूर्योदय के समय पीपल को जल चढ़ाएं और उसकी सात परिक्रमा करें.
शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल और बेल पत्र चढ़ाएं .
गरीब को घर में बैठाकर खाना खिलाएं.

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