•  समलैंगिकता को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने कहा- धारा 377 को अपराध न मानें तो LGBT समुदाय के प्रति कलंक मिट जाएगा

    समलैंगिकता को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने कहा- धारा 377 को अपराध न मानें तो LGBT समुदाय के प्रति कलंक मिट जाएगा

    सुप्रीम कोर्ट में आज समलैंगिकता पर सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 से सहमति से समलैंगिक यौन रिश्तों के अपराध के दायरे से बाहर होते ही एलजीबीटीक्यू समुदाय के प्रति इसे लेकर सामाजिक कलंक और भेदभाव भी खत्म हो जाएगा. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि कई सालों में भारतीय समाज में ऐसा माहौल बना दिया गया है जिसकी वजह से इस समुदाय के साथ बहुत अधिक भेदभाव होने लगा. संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा शामिल हैं. भारतीय दंड संहिता की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा ऐसे लोगों के साथ भेदभाव ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाला है.

  •  समलैंगिकता पर याचिकाकर्ताओं ने कहा- 160 वर्ष पुरानी नैतिकता के कोई मायने नहीं

    समलैंगिकता पर याचिकाकर्ताओं ने कहा- 160 वर्ष पुरानी नैतिकता के कोई मायने नहीं

    धारा 377 हटाने के मुद्दे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इसमें याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलील देते हुए पूर्व अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि ये समलैंगिकता का मसला सिर्फ यौन संबंधों के प्रति झुकाव का है. इसका लिंग से कोई लेना-देना नहीं है. आईपीसी की धारा 377 में दो समलैंगिक वयस्कों के बीच सहमति से शारीरिक संबंधों को अपराध माना गया है और सजा का प्रावधान है. दायर याचिकाओं में इसे चुनौती दी गई है. उधर, भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने समलैंगिकता को हिंदुत्व के खिलाफ बताया.

  •  दाती महाराज के खिलाफ 4 और खुलासे, कल है हाईकोर्ट में सुनवाई

    दाती महाराज के खिलाफ 4 और खुलासे, कल है हाईकोर्ट में सुनवाई

    शिष्या से दुष्कर्म के आरोपी दाती महाराज के खिलाफ राजस्थान में तीन स्तरों पर जांच चल रही है. राज्य महिला आयोग को जांच में भारी गड़बड़ियां मिली हैं. आयोग की रिपोर्ट में जो प्रश्न उठाए गए, दाती के लिए उनका जवाब देना मुश्किल हो सकता है. इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट में दाती के मामले में 11 जुलाई को सुनवाई होगी. यह केस सीबीआई को सौंपने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. हाईकोर्ट ने इसे क्रिमिनल रिट पिटीशन में तब्दील कर दिया और आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली बेंच के पास भेज दिया.

  •  समलैंगिकता अपराध है या नहीं, SC में आज से होगी सुनवाई

    समलैंगिकता अपराध है या नहीं, SC में आज से होगी सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट में नवगठित पांच सदस्यीय संविधान पीठ समलैंगिक यौन संबंधों के मुद्दे सहित चार अहम मामलों पर आज से सुनवाई शुरू करेगी. उच्चतम न्यायालय ने 2013 में समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों को अपराध घोषित कर दिया था. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2009 में अपने एक फैसले में कहा था कि आपसी सहमति से समलैंगिकों के बीच बने यौन संबंध अपराध की श्रेणी में नहीं होंगे. लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को दरकिनार करते हुए समलैंगिक यौन संबंधों को आईपीसी की धारा 377 के तहत अवैध घोषित कर दिया था. उच्चतम न्यायालय के इस फैसले के बाद पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं और जब उन्हें भी खारिज कर दिया गया तो प्रभावित पक्षों ने सुधारात्मक याचिका (क्यूरेटिव पिटीशन) दायर की ताकि मूल फैसले का फिर से परीक्षण हो.

  •  दिल्ली में हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कटे पेड़, वन विभाग को कार्रवाई के निर्देश

    दिल्ली में हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कटे पेड़, वन विभाग को कार्रवाई के निर्देश

    पर्यावरण कार्यकर्ता विमलेंदु झा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) के खिलाफ उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने की वजह से अवमानना याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता झा का कहना है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद एनबीसीसी ने सोमवार को नेताजी नगर में पेड़ों की कटाई की.

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