• कन्या पूजन के बिना अधूरी है नवरात्रि पूजा, पढें सम्पूर्ण पूजन विधि

    कन्या पूजन के बिना अधूरी है नवरात्रि पूजा, पढें सम्पूर्ण पूजन विधि

    शास्त्रों में नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन या कन्या भोज को अत्यंत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। नवरात्रियों में देवी मां के सभी साधक कन्याओं को मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं। सनातन धर्म के लोगों में सदियों से ही कन्या पूजन और कन्या भोज कराने की परंपरा है। विशेषकर कलश स्थापना करने वालों और नौ दिन का वृत रखने वालों को लिए कन्या भोज को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। लोग कन्या पूजा नवरात्रि पर्व के किसी भी दिन या कभी भी कर सकते हैं। लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार, नवरात्रि के अंतिम दो दिनों अष्टमी और नवमीं को कन्या पूजन का श्रेष्ठ दिन माना गया है।

  • नवरात्र में आज चंद्रघंटा देवी की आराधना से होंगे सब दुःख दूर

    नवरात्र में आज चंद्रघंटा देवी की आराधना से होंगे सब दुःख दूर

    शारदीए नवरात्र दूसरे सबसे बड़े नवरात्रों में गिने जाते हैं. इस वर्ष नवरात्र में द्व‌ितीया त‌िथ‌ि दो द‌िन होने के कारण नवरात्र के चौथे द‌िन तृतीया त‌िथ‌ि में देवी के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा देवी की पूजा है. देवीभाग्वत् पुराण में बताया गया है क‌ि मां चंद्रघंटा का स्वरूप बेहद सुंदर, मोहक और अलौकिक है, मां के इस स्वरूप से दिव्य सुगंधियों और दिव्य ध्वनियों का आभास होता है. दस भुजाओं वाली यह माता सिंह यानी शेर पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान होती हैं.

  • नवरात्रि में तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, माँ भक्तों की पूरी करती है हर मनोकामना

    नवरात्रि में तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, माँ भक्तों की पूरी करती है हर मनोकामना

    नवरात्रि के पावन महीने की शुरुवात हो गई है चारो तरफ जय माता दी का जयकारा गूंज रहा है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर हर भक्त माँ को खुश करने की हर कोशिश करता है। इस पावन अवसर पर हम आपको माता के हर रूप और उनकी विसेषता के बारें में बता रहें हैं। आप सभी जानतें हैं नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है। मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। माँ के इस स्वरुप में माता के मस्तक में घंटे का आकार का एक मनमोहक अर्धचंद्र है, इसी के कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है।

  • पहले नवरात्रि में होती है माता शैलपुत्री की आराधना, जानिये क्या है माँ की पूजन-विधि

    पहले नवरात्रि में होती है माता शैलपुत्री की आराधना, जानिये क्या है माँ की पूजन-विधि

    पहले दिन माता शैलपुत्री का वंदन किया जाता है. शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा तिथि को मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस बार 1 अक्टूबर यानि शनिवार को प्रतिपदा तिथि पड़ेगी, इसलिए दिन माता शैलपुत्री की पूजा की पूजा का विधान है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा. हिमालय हमारी शक्ति, दृढ़ता, आधार व स्थिरता का प्रतीक है. मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है. प्रथम दिन की पूजन विधि इस प्रकार है. 

  • इन शुभ मुहूर्त में कीजिये नवरात्रि कलश स्थापना

    इन शुभ मुहूर्त में कीजिये नवरात्रि कलश स्थापना

    कल से आगमन होने जा रहा है शारदीय नवरात्र का. मां शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र 1 अक्टूबर, शनिवार से शुरू हो रहा है, जो 10 अक्टूबर, सोमवार तक रहेगा. इस बार नवरात्र में तृतीया तिथि दो दिन यानि 3 से 4 अक्टूबर तक रहेगी. इसलिए नवरात्रि नौ की बजाए 10 दिन की होगी. इस नौ दिन उत्सव में पहले दिन माता दुर्गा की प्रतिमा तथा घट (कलश) की स्थापना की जाती है. इसके बाद ही नवरात्र उत्सव का प्रारंभ होता है. शुभ मुहूर्त में स्थापना करने से माँ की असीम कृपा आप पर बनेगी. आईए जाने क्या है माता दुर्गा व घट स्थापना की विधि

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