•  गणेशोत्सव स्पेशल: जानिए क्यों है सिद्धिविनायक मंदिर के बप्पा सबसे ख़ास

    गणेशोत्सव स्पेशल: जानिए क्यों है सिद्धिविनायक मंदिर के बप्पा सबसे ख़ास

    पूरे देश में गणेशोत्सव के पर्व की धूम है. हिन्दू धर्म की मान्यता के मुताबिक भगवान गणेश हिंदुओं के प्रथम देव हैं. किसी भी काम को करने से पहले उनकी पूजा की जाती हैं. गणेशोत्सव वैसे तो पूरे देश में बड़े उत्साह और प्रसन्नता से मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में इसकी अलग रौनक देखने मिलती है. जगह-जगह पंडालों में भक्त अपने लाड़ले गणपति बप्पा को स्थापित करते हैं. 10 दिनों तक भक्त उनके श्रद्धा में खोए होते हैं.

  •  भारत के इस मंदिर में होती है बिना सूंड वाले गणेशजी की पूजा

    भारत के इस मंदिर में होती है बिना सूंड वाले गणेशजी की पूजा

    सिटी के नाहरगढ़ पहाड़ी पर स्थित गणेश जी के बाल रूप को देखकर यहां आने वाला हर भक्त मंत्रमुग्ध हो जाता है. बिना सूंड वाले गणेश जी को देखकर लोग चकित भी हो जाते हैं. देश में ये केवल एक ऐसा मंदिर है जहां बिना सूंड वाले गणेश जी की मूर्ती है. गणेश जी का यह प्राचीन टेम्पल राजस्थान की राजधानी जयपुर में है. यह मंदिर गढ़ गणेश के नाम से विख्यात है. गणेश जी के आशीर्वाद से ही जयपुर की नींव रखी गई थी.

  • श्रीराधाकृष्ण के इस मंदिर में रोज लगता है सात बार भोग

    श्रीराधाकृष्ण के इस मंदिर में रोज लगता है सात बार भोग

    राजस्थान के करौली किले में कान्हा जी यानी मदन मोहनजी का मंदिर है। भगवान श्रीकृष्ण के अनेक नामों में से एक मदन मोहन भी है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा गोपाल सिंह ने करवाया था। इस मंदिर में भगवान कृष्ण और देवी राधा की प्रतिमाएं हैं। करौली के निवासियों में मदन मोहन के प्रति अपार श्रद्धा और आस्था है। 

  • एकलौता मंदिर जहां महिला पंडित कराती हैं पूजा

    एकलौता मंदिर जहां महिला पंडित कराती हैं पूजा

    अहिल्‍या के मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालू पहुंचते हैं. ये मंदिर वहीं है, जहां भगवान राम ने अहिल्‍या का उद्धार किया था.

  • मनोकामना पूर्ण होने पर इस मंदिर में चढाएं जाते हैं घोड़े

    मनोकामना पूर्ण होने पर इस मंदिर में चढाएं जाते हैं घोड़े

    हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भद्रकाली देवीकूप मंदिर स्थित है. मां भद्रकाली देवीकूप मंदिर में सती माता का दायां टखना गिरा था और यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां काली के आठ स्वरूपों में से एक है. मन्नत पूरी होने पर यहां श्रद्धालु माता को सोने, चांदी व मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं.

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