•  नवरात्र‍ि के नौ दिन करें इन मंत्रों का जाप, पूरी होगी हर मनोकामना

    नवरात्र‍ि के नौ दिन करें इन मंत्रों का जाप, पूरी होगी हर मनोकामना

    अठारह मार्च को चैत्र शुक्‍ल प्रतिपदा के दिन चैत्र नवरात्र‍ि की शुरुआत हो रही है. 25 मार्च तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाएगी. यह मान्‍यता है कि इन 9 दिनों के दौरान मां दुर्गा की अपने भक्‍तों पर ख़ास कृपा होती है. इस दौरान मां अपने भक्‍तों की हर मुराद पूरी करती हैं. यदि आप भी चाहते हैं कि मां आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें तो नवरात्र‍ि के नौ दिन मां के अलग-अलग स्‍वरूपों के लिए हर दिन मंत्रों का जाप करें.

  •  धनतेरस 2017: स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए जपे ये मन्त्र

    धनतेरस 2017: स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए जपे ये मन्त्र

    भारतीय ज्योतिष के अनुसार, इस बार धनतेरस 17 अक्टूबर को है, और इस दिन लक्ष्मी पूजन समय 7.19 बजे से लेकर 8.17 बजे तक है. धनतेरस के दिन लक्ष्मी व धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है. मत है कि इस दिन धन-धान्य की देवी माँ लक्ष्मी का आगमन होता है लेकिन बहुत कम लोग हैं जिन्हें यह पता है कि इस दिन आयुर्वेद के जनक महर्षि धनवंतरी की विधिवत पूजा करने से स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है.

  •  धनतेरस पर ये मन्त्र देगा आर्थिक संकटों से मुक्ति

    धनतेरस पर ये मन्त्र देगा आर्थिक संकटों से मुक्ति

    धनतेरस के दिन इस मंत्र का जाप करने से विभन्न तरह के परेशानी दूर होते है। बाद में इस मंत्र का सुबह रोज दिये जलाकर जाप करने से घोर आर्थिक संकटों से भी राहत मिलती है।

  • करवाचौथ पर इन मन्त्रों का करें जाप, बनेंगी सौभाग्यवान

    करवाचौथ पर इन मन्त्रों का करें जाप, बनेंगी सौभाग्यवान

    {रविवार|

  •  चंद्र को अर्घ्य दें तब जरूर बोलें, यह करवा चौथ का पवित्र मंत्र

    चंद्र को अर्घ्य दें तब जरूर बोलें, यह करवा चौथ का पवित्र मंत्र

    करवा चौथ एक नारी त्यौहार है। सुहागिन नारी का अपने पति की दीर्घायु आयु और हर प्रकार के सुख-ऐश्वर्य की कामना के साथ किया गया निर्जल उपवास है। ऐसे अनूठे व्रत हिंदू संस्कृति में ही हो सकते हैं। यह नारी पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस पर्व में दिनभर का व्रत करके, शाम को सुहागिनें करवा की कहानियां कहती-सुनती हैं। उसके पश्चात गौरा से सुहाग लेकर तथा उगते चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने सुहाग की अटलता की कामना करती हैं। इस बार जब चंद्र को अर्घ्य दें तो यह मंत्र अवश्य बोलें....

    करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा। ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥

    इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे। सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।

    एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया। सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।

Page 1 of 3