•  धनतेरस क्यों मनाते हैं, पढ़ें पवित्र और पौराणिक कथा

    धनतेरस क्यों मनाते हैं, पढ़ें पवित्र और पौराणिक कथा

    उत्तरी भारत में कार्तिक कृ्ष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व पूरी श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाया जाता है। धन्वंतरि के अलावा इस दिन,देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की भी पूजा करने की मान्यता है।

  •  अहोई अष्टमी की पौराणिक वर्त कथा

    अहोई अष्टमी की पौराणिक वर्त कथा

    प्राचीन काल में एक साहूकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुएं थी। इस साहूकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी। दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गई।  

  • व्रत कथा: यहां पढ़ें पूरी करवा चौथ व्रत कथा

    व्रत कथा: यहां पढ़ें पूरी करवा चौथ व्रत कथा

    बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में खुद खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।

  •  यहाँ जानिये रावण के रहस्य और उसके जन्म की पूरी कथा

    यहाँ जानिये रावण के रहस्य और उसके जन्म की पूरी कथा

    वैसे तो लोग लंकापति रावण को अनीति, अनाचार, दंभ, काम, क्रोध, लोभ, अधर्म और बुराई का प्रतीक मानते हैं और उससे घृणा करते हैं। किंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यहां यह है कि दशानन रावण में कितना ही राक्षसत्व क्यों न हो उसके गुणों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

  •  ओड़िसा: इस भक्त ने करवाया भगवान से चमत्कार, अपने आप रुक जाया करती थी यात्रा

    ओड़िसा: इस भक्त ने करवाया भगवान से चमत्कार, अपने आप रुक जाया करती थी यात्रा

    प्रभु जगन्नाथ को श्रधालुयों का भगवान कहा जाता है. जब-जब भक्तों ने श्रद्धा से पुकारा भगवान उस के साथ खड़े हुए दिखाई दिए. यह माना जाता है जब तक प्रभु जगन्नाथ का डोरी नहीं लगता तब तक प्रभु के दर्शन नहीं हो पाते हैं. कई ऐसी कहानियां है जब प्रभु जगन्नाथ अपने भक्तों के उम्मीद पर खरे उतरे हैं. कभी प्रभु अपने भक्तों के लिए साक्षी देने के लिए निकल पड़ते हैं तो कभी दासिया नामक एक दलित के हाथ से नारियल उठा लेते हैं. महाप्रभु जगन्नाथ के समक्ष न कोई जाती होती है न कोई धर्म. जो भी भगवान जगन्नाथ को भक्ति से पुकारता है भगवान उस की भक्ति पर खरे उतरते हैं.

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