•  भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इस कथा का जरूर करें पाठ: देवउठनी एकादशी

    भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इस कथा का जरूर करें पाठ: देवउठनी एकादशी

    देवउठनी एकादशी के दिन पूरे दिन व्रत के बाद संध्या को भोजन करने से सात जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है. देव उठनी एकादशी जिसे प्रबोधनी एकादशी भी कहा जाता है. इसे पापमुक्त करने वाली एकादशी भी माना जाता है. मत है कि जितना पुण्य राजसूय यज्ञ करने से होता है उससे अधिक देवउठनी एकादशी के दिन होता है. इस दिन से चार माह पूर्व देवशयनी एकादशी मनाई जाती है. इसके लिए माना जाता है कि भगवान विष्णु समेत सभी देवता क्षीर सागर में जाकर सो जाते हैं. इसलिए इन दिनों पूजा-पाठ और दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं. किसी तरह का शुभ कार्य जैसे शादी, मुंडन, नामकरण संस्कार आदि नहीं किए जाते हैं.

  •  Chhath Pooja 2017: आज है खरना, व्रती रखेंगे 36 घंटे का उपवास

    Chhath Pooja 2017: आज है खरना, व्रती रखेंगे 36 घंटे का उपवास

    दीपावली की धूम के बाद उत्तर पूर्वी इंडिया का महान लोकपर्व छठ की पूजा शुरू हो चुकी है. शास्त्रों के मुताबिक सूर्यषष्ठी के नाम से बताया गया यह पर्व चार दिनों तक चलता है. इस त्यौहार में महिलाएं चार दिनों तक व्रत करती है. इस पर्व को उत्तर पूर्वी भारत यानी पूर्वांचल में विशेष तौर से मनाया जाता है. इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल का तराई इलाका प्रमुख तौर पर शामिल है.

  •  छठ महापर्व: पढ़िये विस्तार से इस खबर को, चार दिनों तक चलता है ये पर्व

    छठ महापर्व: पढ़िये विस्तार से इस खबर को, चार दिनों तक चलता है ये पर्व

    मंगलवार यानि आज से आरंभ हो चुका है छठ पर्व. पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत, बिहार और झारखंड के कई हिस्सों में इसे बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है. इस पर्व में भगवान सूर्य की उपासना होती है. कहा जाता है यह व्रत बेहद मुश्किल होता है. इसमें महिलाएं 36 घंटे तक निर्जला रहती हैं. चार दिनों तक चलने वाला ये पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता है और सप्तमी तक चलता है. पहले दिन नहाय खाय से शुरू होकर चौथे दिन ऊषा अर्घ्य के साथ इस व्रत की समाप्ति होती है. जानते हैं हर दिन का क्या है खास महत्व:

  •  क्यों मनाई जाती है दिवाली, जानिए कुछ पौराणिक रोचक कथाएं

    क्यों मनाई जाती है दिवाली, जानिए कुछ पौराणिक रोचक कथाएं

    दीपावली हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है. इस बार यह 19 अक्टूबर को पूरे हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है. यह त्यौहार 5 दिनों (धनतेरस, नरक चतुदर्शी, अमावश्या, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, भाई दूज) का होता है, इसलिए यह धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज पर समाप्त होता है. आइए जानते हैं कि इस बड़े पर्व दिवाली महत्व क्या है और क्या है इसके पीछे की कहानी? हम आपको बताने जा रहे हैं दिवाली के बारे में प्रचलित कुछ रोचक बातें.

  • ...इन वजहों से मनाया जाता है दीपावली का त्यौहार

    ...इन वजहों से मनाया जाता है दीपावली का त्यौहार

    हम दीवाली क्‍यों मनाते हैं? आखिर इसके पीछे क्‍या कारण है। कुछ लोगों का कहना है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध करके अयोध्या वापस लौटे थे। उनके अयोध्‍या आने की खुशी में दीपावली का पर्व मनाया जाता है।

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