•  नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए जरुरी है ये सामग्री, यह है शुभ मुहूर्त

    नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए जरुरी है ये सामग्री, यह है शुभ मुहूर्त

    नवरात्रि के पर्व का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. साल में इस पर्व को दो बार मनाया जाता है. पहला चैत्र नवरात्रि तो दूसरा शारदीय नवरात्रि. इस साल शारदीय नवरात्रि 10 अक्टूबर से शुरू हो रही है. इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है और व्रत भी रखा जाता है. हालांकि नवरात्र में व्रत की शुरुआत करने के पहले कलश स्थापना भी किया जाता है. मान्यता है कि व्रत रखने से मां दुर्गा को प्रसन्न किया जा सकता है. नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश स्थापित किया जाता है. कलश स्थापना के लिए सबसे पहले एक कलश की आवश्यकता पड़ेगी. कलश सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का हो सकता है. इसके अलावा कलश स्थापना के लिए सामग्री में नारियल, मौली, धुले हुए 5/7/11 आम के पत्ते, रोली, शुद्ध जल और गंगा जल, केसर, जायफल, सिक्का, चावल और गेहूं की जरूरत होगी.

  • इन संकेतों से माँ अपने भक्तों को बताती हैं उनका भविष्य

    इन संकेतों से माँ अपने भक्तों को बताती हैं उनका भविष्य

    नवरात्र के द‌िनों में जब मां धरती पर होती हैं उस समय कुछ संकेतों से यह बता देती हैं क‌ि आने वाला साल देश दु‌न‌िया और उनके भक्तों के लिए कैसा रहेगा आने वाला साल. जानिये उन संकेतों के बारे में.नवरात्र के पहले द‌िन कलश स्थापना क‌िया जाता है. कलश पूजा के दौरान कलश के नीचे जयन्ती बोया जाता है. सामान्यतया दो से तीन दिन में जौ से अंकुरित होकर जयंती निकल आती है. जयंती देर से निकलने का मतलब यह है क‌ि देवी संकेत दे रही है क‌ि आने वाले साल में काफी परिश्रम करना पड़ेगा.

  •  राधाष्टमी पर ब्रज और बरसना में मची धूम, क्या आप जानते हैं राधा रानी की इन नामों से भी होती है पूजा

    राधाष्टमी पर ब्रज और बरसना में मची धूम, क्या आप जानते हैं राधा रानी की इन नामों से भी होती है पूजा

    भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को एक-दूसरे का पूरक कहा गया है. कृष्ण से जुड़े किसी भी ग्रंथ में राधा का प्रसंग, भगवान के लीलाधर रूप को संपूर्ण बनाता है. कृष्ण और राधा के आध्यात्मिक प्रेम को हिन्दू शास्त्रों में सौंदर्य और श्रृंगार से ज्यादा, भक्तिपूर्ण बताया गया है. भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि सूरदास ने कृष्ण और राधा के संबंध को लोक से परे लोकोत्तर बताया है. सूरदास के लेखन में राधा, प्रेम-प्रतिमा और प्रेम-प्रतीक के रूप में हमारे सामने आती हैं. सूरदास ने राधा को अद्भुत सौंदर्य का धनी और मोहक लावण्य से भरी हुई भगवान की प्रेयसी के रूप में वर्णित किया है. बृजभूमि में भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के मध्य होने वाली रास-लीला में सूरदास ने राधा को मूल क्रियाशक्ति बताया है. राधा की इन्हीं विशेषताओं के कारण उन्हें कई नामों से जाना जाता है. यूं तो राधा रानी के अनेक नाम हैं, लेकिन आज राधाष्टमी पर आइए जानते हैं राधा के कुछ प्रमुख नामों के बारे में.

  •  हरतालिका तीज: जानिए- महिलाएं क्यों रखती हैं यह व्रत, इसका शिव पार्वती से क्या रिश्ता

    हरतालिका तीज: जानिए- महिलाएं क्यों रखती हैं यह व्रत, इसका शिव पार्वती से क्या रिश्ता

    देश में आज 12 सितंबर 2018 को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जा रहा है. महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई राज्यों में इसे हरतालिका तीज के नाम से जानते हैं और दक्षिण भारतीय राज्यों में इसे गौरी हब्बा के नाम से जानते हैं. इस व्रत को विवाहित और अविवाहित लड़कियां कर सकती हैं. विवाहित महिलाएं जहां अपने पति की दीर्घ आयु के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छा और मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए व्रत रखती हैं.

  •  गणेश चतुर्थी 2018 : भूलकर भी न खरीदें गणेश जी की ऐसी प्रतिमा, नहीं तो लगेगा दोष

    गणेश चतुर्थी 2018 : भूलकर भी न खरीदें गणेश जी की ऐसी प्रतिमा, नहीं तो लगेगा दोष

    भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. इस बार गणेश चतुर्थी 13 सितंबर को मनाई जाएगी. गणेश चतुर्थी के मौके पर उनके भक्त अपने घर भगवान गणेश की मूर्ति लेकर आते हैं और पूरे गणेशोत्सव के दौरान उनकी खूब सेवा करते हैं. फिर 10 दिनों बाद उन्हें विदा कर देते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान भगवान गणेश अपने भक्तों के आसपास ही रहते हैं और उनकी मन के अरदास को सुनते हैं. इस दौरान मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है.

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