•  राशिनुसार जानें ये ‘नौ रातें’ क्या लाई हैं आपके लिए

    राशिनुसार जानें ये ‘नौ रातें’ क्या लाई हैं आपके लिए

    ज्ञात हो नौ रातों में ग्रहों की दशा बदलती है. कहा जाता है सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं. इसका सभी राशि‍यों पर प्रभाव पड़ता है. जानिये आपकी अपनी राशि पर क्या  प्रभाव होगा. जानते हैं कितना फलदाई है ये आपके लिए राशियों के मुताबिक. पढ़ें क्या कुछ है आपके लिए इन नौ रातों में.

  •  नवरात्रि पर जानें माँ दुर्गा के सम्पूर्ण नौ रूपों के बारे में

    नवरात्रि पर जानें माँ दुर्गा के सम्पूर्ण नौ रूपों के बारे में

    हिन्दू पंचांग के मुताबिक, चैत्र मास की नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि और शरद ऋतु में आने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है. दोनों ही नवरात्रि में दुर्गा के नौ स्वरूपों का पूजन किया जाता है. यही दो नवरात्रि अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. एक नज़र डालते हैं माता के नाम और तिथियों पर.

  •  जानें कब है चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और सही समय

    जानें कब है चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और सही समय

    चैत्र नवरात्र‍ि से नववर्ष के पंचांग की गणना शुरू होती है. वर्ष में 3 बार लोग नवरात्र‍ि मनाते हैं. पहली चैत्र नवरात्र‍ि मनाई जाती है, दूसरी शारदीय नवरात्रि और इसके अतिरिक्त लोग गुप्‍त नवरात्र‍ि भी मनाते हैं. इन तीनों नवरात्र‍ि में लोग मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं. यह चैत्र शुक्‍ल पक्ष की वासंतिक नवरात्र‍ि है.

  •  होलिका दहन पूजा 2018: क्यों किया जाता होलिका दहन, किस शुभ मुहूर्त में करें इस बार पूजा

    होलिका दहन पूजा 2018: क्यों किया जाता होलिका दहन, किस शुभ मुहूर्त में करें इस बार पूजा

    होली का त्‍योहार फाल्‍गुन मास में पूर्ण‍िमा के दिन मनाया जाता है. इस साल यह 2 मार्च 2018 को मनाया जाएगा. यानी 1 मार्च को होलाष्टक खत्‍म होने के साथ होलिका दहन होगा और 2 मार्च को रंगों के साथ त्योहार मनाया जाएगा. वहीं होलिका दहन 1 मार्च को मनाया जाएगा. होलिका दहन को लोग छोटी होली भी कहते हैं.

  • जानें क्या है ब्रज की मशहूर लट्ठमार होली का इतिहास?

    जानें क्या है ब्रज की मशहूर लट्ठमार होली का इतिहास?

    दुनियाभर में मशहूर है ब्रज की लट्ठमार होली. सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं हर तरफ इससे जुड़े आनन्द के किस्से सुने-सुनाये जाते हैं. ब्रज वही जगह हैं जहाँ स्वयं प्रभु ने होली का उत्सव मनाया था. देसी-विदेसी हर तरह के लोग ब्रज की गलियों में खेली जाने वाली इस अलग तरह की होली देखने के लिए पहुंचते हैं. इस तरह की होली की पीछे यह कारण भी माना जाता है कि ऐसा करके प्रभु श्रीकृष्ण के काल में उनके द्वारा की जाने वाली लीलाओं की पुनरावृत्ति की जा रही है.

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