चंपारण: PM मोदी ने बापू की कर्मभूमि से दिया स्‍वच्‍छता का संदेश

मोदी ने स्वच्छता सचिव की तरफ कैमरा मुड़वाकर कहा- ये ऐसे आईएएस हैं जो खुद शौचालय साफ करते हैं

चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के समापन पर पीएम नरेंद्र मोदी बुधवार को मोतिहारी पहुंचे. यहां से रिमोट के जरिए 1186 करोड़ की पांच परियोजनाओं की नींव रखी. गांधी मैदान में देश भर से जुटे 20 हजार स्वच्छाग्रहियों में से कई को सम्मानित किया. यहां से 'सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह' अभियान का आगाज भी किया गया. 

इस मौके पर उन्होंने केंद्र सरकार में स्वच्छता एवं पेयजल मंत्रालय के सचिव परमेश्वर अय्यर की तारीफ की. उन्होंने कहा वे अमेरिका से नौकरी छोड़कर भारत आए. वे खुद शौचालय साफ करते हैं. बता दें कि महात्मा गांधी ने दस अप्रैल 1917 को चंपारण सत्याग्रह किया था. इसकी याद में पिछले साल इसका शताब्दी समारोह शुरू किया गया था, बुधवार को इसका समापन किया गया.

मोदी ने करीब बीस हजार स्वच्छाग्रहियों को दिए अपने संबोधन की शुरुआत भोजपुरी में की. उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह के वक्त चंपारण के लोगों के साथ मिलकर महात्मा गांधी ने सत्याग्रह की शुरुआत की थी. आज हम बापू के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं. जो लोग कहते हैं कि इतिहास खुद को दोहराता नहीं है. वो यहां आकर देख सकते हैं कि कैसे सौ वर्ष पहले का इतिहास आज भी साक्षात हमारे सामने मौजूद है. एक प्रकार से मेरे सामने वो स्वच्छाग्रही बैठे हैं जिनके अंदर गांधी के विचार-आदर्श का अंश जीवित हैं. मैं ऐसे सभी स्वच्छाग्रहियों के भीतर मौजदू गांधीजी के अंश को शत-शत प्रणाम करता हूं.

मोदी ने कहा कि कुछ देर पहले मुझे कुछ स्वच्छाग्रही साथियों को सम्मानित करने का मौका मिला है. मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं. बढ़चढ़कर हिस्सा लेने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है. स्वच्छता का महत्व हमारी माताएं-बहनें भली-भांति जानती हैं. आज मुझे एक शख्स के सम्मान करने का अवसर नहीं मिला. मगर मैं आज प्रशासनिक मर्यादाओं को तोड़कर उस बात का जिक्र करना चाहूंगा. सरकार में कार्य करने वाले अधिकारी अनाम होते हैं. उनकी पहचान नहीं हो पाती. वे परदे के सामने नहीं आ पाते.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में हमारे सचिव परमेश्वरजी अय्यर इस काम को देख रहे हैं. वे आईएएस की नौकरी छोड़कर अमेरिका चले गए थे. वहां सुख-चैन की जिंदगी गुजार रहे थे. हमारी सरकार बनने के बाद हमने कई लोगों को आह्वान किया. मुझे खुशी है कि अमेरिका की शानदार जिंदगी छोड़कर वे भारत वापस लौट आए. मैंने उन्हें सरकार में लिया और स्वच्छाग्रह का काम दिया. वे खुद जगह-जगह जाकर शौचालय की सफाई करते हैं और आज परमेश्वरजी जैसे मेरे साथी हैं. 

बता दें कि 56 साल के परमेश्वर यूपी कैडर के आईएएस अफसर हैं. उन्हें 2016 में पेयजल और स्वच्छता विभाग का सचिव बनाया गया था. 2016 में हीमोदी सरकार ने उन्हें स्वच्छ भारत मिशन और वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के बीच तालमेल बनाने के लिए जिम्मेदारी दी थी. 2009 में रिटायर होने के बाद अय्यर ने जल सूरज प्रोग्राम को लॉन्च किया था और बाद में वर्ल्ड बैंक ज्वॉइन कर लिया था.

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