नवरात्री के दूसरे दिन की जाती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

 नवरात्री का दूसरा दिन : इस दिन की जाती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. मां ब्रह्मचारिणी को भगवती भी कहते हैं. ऐसी मान्यता है कि मां ब्रह्चारिणी ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए एक हजार वर्ष तक तपस्या की थी. इनकी अराधना करने वाले भक्तों में एकाग्र रहने की क्षमता काफी अधिक होती है. वह जीवन में कभी भटकते नहीं.

बता दें कि ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली. देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत दर्शनीय है. मां के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
सुबह नहा कर सूर्य को जल चढ़ाएं और तुलसी व भगवान शालिग्राम को भी जल चढ़ाएं. जिस जगह मां दुर्गा की स्थापना की है वहां बैठकर मां ब्रह्मचारिणी को नमन करें और मां के मंत्र का जाप करें. इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी कथा का पाठ करें. इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है.

मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां बह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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