NDA को लगा बड़ा झटका, TDP हुई अलग

NDA को बड़ा झटका, TDP ने समर्थन वापस लिया, संसद में अविश्वास प्रस्ताव भी लाएगी

मोदी गवर्नमेंट को केंद्र में लगभग 4 वर्ष हो गए हैं और अब अगले आम चुनावों की तैयारियां भी जोरों पर हैं. मगर इस बीच मोदी गवर्नमेंट के लिए विपक्षी और साथी दल मुसीबत का सबब बनते जा रहे हैं. शुक्रवार को संसद में मोदी गवर्नमेंट के विरुद्ध पहला अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा सकता है. इसी बीच चंद्रबाबू नायडू की TDP एनडीए से अलग हो गई है. आंध्रप्रदेश को विशेष दर्जा ना मिलने से नाराज़ TDP ने शुक्रवार सुबह ये बड़ा फैसला लिया.

बता दें कि इस मसले को लेकर पहले ही TDP कोटे के मंत्रियों ने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया था. वहीं, बीजेपी कोटे के मंत्रियों ने राज्य गवर्नमेंट से अपना इस्तीफा दे दिया था. चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार शाम को अपने सांसदों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की थी. कुछ देर में चंद्रबाबू नायडू भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ई-मेल और फैक्स के जरिए इस बात की आधिकारिक जानकारी देंगे.

TDP सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने इस मसले को लेकर पार्टी की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली कमेटी पोलित ब्यूरो के साथ बैठक की. नायडू ने NDA से अलग होने का निर्णय इसी बैठक में लिया. TDP का आरोप है कि बीजेपी ने आंध्र प्रदेश के साथ सही तरीके से बर्ताव नहीं किया. इसी बैठक में पार्टी ने फैसला किया है कि वह लोकसभा में मोदी गवर्नमेंट के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी.

आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस गवर्नमेंट के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी. वाईएसआर पार्टी के 6 सांसदों ने शुक्रवार के लिए लोकसभा महासचिव को प्रस्ताव का नोटिस दिया है. मतलब साफ है कि अब टीडीपी लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है.

जगन मोहन रेड्डी की पार्टी इसके लिए अन्य विपक्षी दलों से समर्थन भी जुटा रही है. पार्टी के सांसद जगन की ओर से लिखे गए एक पत्र को संसद के भीतर विपक्षी सांसदों के बीच बांट रहे हैं और उनसे इस प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं. सदन में इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है.

क्या होगी प्रक्रिया?
नियमों के अनुसार, सबसे पहले लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन वाईएसआर कांग्रेस के किसी सांसद को अविश्वास प्रस्ताव पेश करने को कहेंगी. जिसके बाद करीब 50 सांसदों को इसका समर्थन करने के लिए खड़ा होना होगा, तभी इसके आगे की प्रक्रिया आरंभ होगी. मगर इसमें भी एक पेंच है, ये प्रस्ताव तभी पेश हो सकता है कि जब सदन ऑर्डर में हो, अगर कोई सांसद इस दौरान हंगामा कर रहा हो तो प्रस्ताव पेश करने में मुश्किल हो सकती है.

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