जानिए: क्यों 250 लड़कों के बीच अकेली पढ़ती है यह लड़की

 लड़कियों के स्कूल में एडमिशन न मिलने कारण यह लड़की 250 लड़कों के बीच पढ़ती है अकेली

किसी भी स्कूल में या तो सिर्फ लड़के पढ़ते हैं या लड़कियां या तो दोनों साथ-साथ. लेकिन क्या ऐसे स्कूल के बारे में सुना है जहां 250 लड़कों के मध्य में सिर्फ एक लड़की पढ़ती हो? देहरादून का कर्नल ब्राउन क्रेम्ब्रिज स्कूल ऐसा ही स्कूल है और स्कूल में छठी क्लास में पढ़ने वाली शिकायना वो लड़की हैं. 12 साल की उम्र में शिकायना इस बात से बेहद खुश हैं. उसको इसमें कुछ भी नया नहीं लगता. बीबीसी से बातचीत में शिकायना ने कहा, थोड़ा अलग अनुभव जरूर है. पर लड़कियां सब कुछ कर सकती हैं तो फिर मैं ब्वॉएज स्कूल में क्यों नहीं पढ़ सकती.

इस सवाल के जवाब में शिकायना ने बेहद मजेदार किस्सा सुनाया. जब मैं पहले दिन क्लास में जाकर बैठी, क्लास में घुसते ही टीचर ने अपने पुराने अंदाज में कहा गुड मॉर्निंग ब्वॉएज लेकिन जैसे ही उनकी नजर मुझ पर पड़ी, तुरंत उन्होंने खुद को सही किया और कहा- अब मुझे गुड मार्निंग स्टूडेंट्स बोलने की आदत डालनी पड़ेगी. ये किस्सा सुनाते ही शिकायना जोर-जोर से हंसने लगीं. शिकायना गाना बहुत अच्छा गाती हैं. टीवी पर कई शो में हिस्सा भी ले चुकी हैं. &TV पर आने वाले शो ‘वॉयस ऑफ इंडिया’ में शिकायना ने पिछले सीजन में हिस्सा लिया था और वो फाइनल राउंड तक भी पहुंची थीं. इसके लिए सितंबर 2017 से फरवरी 2018 तक उसे अपने पुराने स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ी थी. जब रिएलिटी शो के फाइनल में हिस्सा लेने के बाद शिकायना वापस लौटीं तो स्कूल ने उन्हें अगली क्लास में भेजने से मना कर दिया.

इसके बाद शिकायना के पिता ने अपने ही स्कूल में शिकायना को एडमिशन देने के लिए बात की. शिकायना के पिता विनोद मुखिया ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि ऐसा नहीं था कि स्कूल प्रशासन ने एक बार में ही उनकी बात मान ली. उनके अनुसार, स्कूल ने शिकायना के बारे में अपना फैसला सुनाने में 15-20 दिन का वक्त लिया. केवल शिकायना का एडमिशन ही एकमात्र समस्या नहीं थी. स्कूल को इस एडमिशन से उठने वाले कई दूसरे सवालों पर भी विचार करना था.

शिकायना के पिता विनोद बताते हैं, आखिर स्कूल में शिकायना की ड्रेस क्या होगी? टॉयलेट रूम कहां होगा? अगर दूसरे टीचर भी ऐसी ही मांग करना चाहेंगे तो क्या होगा- स्कूल प्रशासन को इन मसलों का हल ढूंढना था. 20 दिन बाद स्कूल प्रशासन ने अपना निर्णय विनोद को सुनाया जो शिकायना के पक्ष में था. शिकायना अपने पुराने स्कूल में ट्यूनिक पहनती थीं. लेकिन नए स्कूल में वो लड़कों जैसा ही यूनिफॉर्म पहन कर जा रही हैं. यूनिफॉर्म तय करने की प्रक्रिया भी कम मजेदार नहीं थी.

शिकायना एक किस्सा सुनाने लगती हैं. अब क्लास में कोई लड़का शैतानी करता है तो उसके लिए हर टीचर लड़कों को यही कहती हैं क्लास में एक लड़की है तुम कुछ तो शर्म करो. इसलिए लड़कों को लगने लगा है कि मेरी वजह से उनको डांट ज्यादा पड़ती है. शिकायना के एडमिशन के बाद एक दूसरी समस्या गर्ल्स टॉयलेट की भी थी, लेकिन स्कूल प्रशासन ने नया बंदोबस्त करने के बजाए शिकायना को टीचर टॉयलेट इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी. पर एक स्कूल में केवल ड्रेस और टॉयलेट ही नहीं- बच्चों को कई और चीजों की भी जरूरत होती है. जैसे खेलने और दिल की बात करने के लिए साथी की. लड़कों और लड़कियों के लिए खेल भी अमूमन अलग होते हैं और दोस्त भी. साथ ही बात करने के विषय भी.

बीबीसी को शिकायना ने बताया कि उसकी रूचि लड़कियों की तरह नहीं है. 12 साल की लड़की वैसे तो गुड़ियों से खेलना, थोड़ा फैशन करना, थोड़ा फिल्मों और सीरियल की बात करना शुरू कर देती हैं, लेकिन शिकायना को ये सब बिल्कुल पसंद नहीं. नए स्कूल में शिकायना ने लॉन टेनिस खेलना शुरू किया है. लेकिन यहां भी उनकी पहली पंसद गाना ही है.

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