• एक और हिंदू पुजारी पर चाकू से किया गाया घायल, बांग्लादेश के मंदिर में एक और जानलेवा हमला

    एक और हिंदू पुजारी पर चाकू से किया गाया घायल, बांग्लादेश के मंदिर में एक और जानलेवा हमला

    बांग्लादेश में उथल-पुथल मची हुई है। एक तरफ वहां आतंकी हमला हुआ है, वहीं हिंदू पुजारियों पर लगातार हमले हो रहे हैं। शनिवार को फिर से एक मंदिर के हिंदू पुजारी भाबासिंधु रॉय पर हमला कर दिया। हमले में रॉय गंभीर रूप से घायल हो गए। बीते 24 घंटों में पुजारी पर हमले की ये दूसरी घटना है। इससे पहले शुक्रवार को मंदिर में घुसकर पुजारी श्यामोन दास की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने बताया कि सत्खिरा जिले में श्री श्री राधा गोविंद मंदिर के भाबासिंधु राय पर उस समय मंदिर में हमला किया गया जब वह सो रहे थे। पुलिस के हवाले से बताया कि सात से आठ हमलावरों ने पुजारी के घर का दरवाजा खटखटाया। पुजारी ने जसे दरवाजा ही दरवाजा खोला हमलावर घर में घुस आए और उन्होंने धारदार हथियारों से उनके सीने एवं पीठ पर हमला किया। उन्हें ढाका के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। पीड़ित की पत्नी समित्रा बोर के हवाले से पुलिस ने बताया कि घटनास्थल पर पुलिस के पहुंचने से पहले ही हमलावर वहां से फरार हो गए। सतखीरा पुलिस के डिप्टी चीफ अतकुल हक की मानें तो हाल ही में हिंदुओं पर हुए हमले में संदिग्ध आतंकियों का हाथ हो सकता है। बांग्लादेश में एक हिन्दू पुजारी श्यामोन दास और बौद्ध नेता की कल हत्या कर दी थी जबकि एक और हिन्दू व्यक्ति हमले में बाल बाल बच गया। पुलिस ने बताया था कि मोटरसाइकिल पर सवार तीन हमलावरों ने श्यामानंद दास पर धारदार हथियारों से हमला किया। दास उस समय सुबह की पूजा के लिए क्षैनिदाह में राधामदन गोपाल मठ परिसर के बगीचे में फूल तोड़ रहे थे। 16 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में मुस्लिमों की मेजॉरिटी है, बीते कुछ महीनों में हिंदुओं और लिबरल एक्टिविस्ट्स पर इस्लामी आतंकियों के हमले बढ़े हैं। जून में भी 70 साल के पुजारी आनंद गोपाल गांगुली हत्या कर दी गई थी। गांगुली की डेड बॉडी मंदिर के पास चावल के खेत में मिली। उनका सिर धड़ से अलग था। पुजारी की हत्या के बाद पुलिस ने बड़े लेवल पर ऑपरेशन चलाया और अलग-अलग जगहों पर रेड मारी। तीनों संदिग्ध गैरकानूनी संगठन जमातुल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के मेंबर थे।

  • आतंकी हमलाः ढाका में IS का हमला, शेख हसीना बोलीं ‘रमजान में हमला करने वाले मुस्लिम नहीं’

    आतंकी हमलाः ढाका में IS का हमला, शेख हसीना बोलीं ‘रमजान में हमला करने वाले मुस्लिम नहीं’

    ढाका. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आतंकी हमला हुआ है। शुक्रवार रात यहां के पॉश इलाके गुलशन डिप्लोमेटिक जोन की एक बेकरी में 9 आतंकियों ने हमला कर लोगों को बंधक बना लिया। इनमें से ज्यादातर विदेशी हैं और अब आईएसआईएस आतंकियों के खिलाफ चल रहा ऑपरेशन खत्म हो गया है । सुरक्षाबलों ने रेस्टोरेंट में बंधक बनाए गए सभी लोगों को निकाल लिया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सभी 13 बंधकों को रेस्टोरेंट से सुरक्षित निकालने और ऑपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम देने पर सुरक्षाबलों को बधाई दी है। शेख हसीना ने आतंकी हमले की निंदा करते हुए ये भी कहा कि रमजान के पाक महीने में इंसानों के मारने वाले ये कैसे इंसान हैं। इससे पहले लेफ्टिनेंट करनल तुहिन मोहम्मद मसूद ने स्थानीय मीडिया को जानकारी दी थी कि बंधकों में भारतीय और जापानी भी शामिल थे। हमले के बाद दिल्ली में विदेश मंत्रालय की ओर से एक बयान जारी कर बताया गया है कि भारतीय दूतावास के अधिकारी और कर्मचारी सुरक्षित हैं। पुलिस के मुताबिक हथियारबंद हमलावर करीब 8:45 बजे गुलशन राजनयिक इलाके में स्थित होली आर्टिसन बेकरी रेस्तरां में घुस गए और स्थानीय समयानुसार करीब 9:20 गोलीबारी शुरू कर दी। आतंकियों को किसी तरह की पब्लिसिटी न मिले या वो फोर्सेस के मूवमेंट को न समझ पाएं, इसके लिए बांग्लादेश में इस घटना की मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी गई है। इसमें 6 आतंकवादी मारे गए और एक को जिंदा भी पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक हथियारबंद हमलावर करीब 8:45 बजे “अल्लाह-ओ-अकबर ‘ बोलते हुए रेस्टोरेंट में घुस गए और चीफ शेफ सहित सबको बंधक बना लिया और स्थानीय समयानुसार करीब 9:20 गोलीबारी शुरू कर दी। यह रेस्तरां विदेशियों, राजनयिकों और मध्यवर्गीय परिवारों के बीच बेहद लोकप्रिय है। हमलावर ग्रेनेड, बंदूकें और तलवारें लिए हुए हैं। वे अंदर से ग्रेनेड फेंक रहे थे। और रुक-रुककर गोलीबारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि रेस्टोरेंट का मालिक सुमन रजा वहां से भागने में कामयाब रहा। पुलिस व रैपिड एक्शन बटॉलियन ने रेस्टोरेंट को घेर लिया। हमलावर कौन हैं और उनका मकसद क्या है, अभी इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है। बांग्लादेश में स्थिति काफी तनावपूर्ण है और राजधानी में हाई अलर्ट कर दिया गया है।

  • वो मेरा रेप करते रहे, 43,000 बार हुई रेप की शिकार

    वो मेरा रेप करते रहे, 43,000 बार हुई रेप की शिकार

    मेक्सिको सिटी। मेक्सिको में ह्यूमन ट्रैफिकर्स के बीच फंसी एक लड़की की हैरत में डालने वाली कहानी सामने आई है। एक नहीं दो नहीं 43,200 बार हुआ रेप। सेक्शुअल एब्यूज का शिकार हुई लड़की का नाम कार्ला जैसिंटो है। कार्ला कहती हैं कि, “पांच साल की उम्र में ही एक रिलेटिव ने मेरा रेप किया था। 12 साल की उम्र में एक सेक्स ट्रैफिकर से मेरी मुलाकात हुई। उसने मुझे अपनी बातों में फंसाया मुझे नहीं पता था उसकी नियत ख़राब थीI कार्ला के मुताबिक, "मेक्सिको में एक सबवे स्टेशन के नजदीक एक शख्स मेरे पास आया और मुझसे बातें करने लगा। बातों-बातों में उसने बताया कि वो भी कई बार यौन शोषण का शिकार हो चुका है। मुझे उससे हमदर्दी हुई और मैंने उसे अपना फ़ोन नंबर दिया। उसके पास अच्छी गाड़ी थी । मैंने उसकी कार देखी तो मुझे यकीन नहीं हुआ। मैं उससे बहुत इम्प्रैस थी। उसने मुझे अपना घर भी दिखाया।" कार्ला ने बताया कि उसे अपने जाल में फंसाने वाले शख्स की उम्र 22 साल थी। वह तीन महीनों तक उसके साथ रही, जिस दौरान उसने काफी अच्छा बिहेव किया। उसने बताया, "वो मुझे प्यार करता था और मेरे लिए कपड़े, जूते, चॉकलेट और फूल लाता था। वो मेरी तरफ ध्यान देता था। सब कुछ बहुत खूबसूरत था। लेकिन मैं यह नहीं जानती थी वो यह सब किसलिए करता थाI एक दिन में 20-30 बार होता था मेरा बलात्कार कार्ला ने बताया, "उसका कजिन हर दिन अपार्टमेंट में अलग-अलग लड़कियां लेकर आता था। पूछने पर पता चला कि वो दलाल हैं। धीरे-धीरे उसने मुझे इसमें धकेल दियाI कुछ दिन बाद वो मुझे इस बिजनेस के बारे में बताने लगा। मुझे क्लाइंट के साथ क्या करना है और कितने पैसे लेने हैं। मैं पहली बार ग्वालाजारा में क्लाइंट के पास गई। हम वहां एक हफ्ते तक रुके। मैं सुबह 10 बजे से आधी रात तक क्लाइंट्स के साथ रहती। हर दिन मेरे साथ 20 पुरुष सोते थे। कुछ लोग मुझपर हंसते भी थे, क्योंकि मैं रोती थी।" कार्ला ने बताया कि प्रॉस्टिट्यूशन के लिए उसे कई शहरों, ब्रॉदल्स और होटल्स में भेजा गया। कुछ दिनों तक प्रॉस्टिट्यूट की तरह भेजने के बाद उसे हर दिन 30 लोगों के साथ सेक्स करने को मजबूर किया जाता रहा। 13 साल की इस छोटी सी उम्र में उससे यह सब करवाया जाता। हफ्ते में सातों दिन जबरदस्ती यह काम करवाया जाता। इस दौरान उसे मारा-पीटा जाता और हर तरह से प्रताड़ित किया जाता, इतनी कम उम्र में इस दौर से गुजरने की वजह से कार्ला दिमागी रूप से काफी परेशान रहने लगी थी। 2008 में एक एंटी-ट्रैफिकिंग ऑपरेशन में उसे प्रॉस्टिट्यूशन से निकाला गया। उस दौरान उसकी उम्र 16 साल थी। आज कार्ला 23 साल की है और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खिलाफ काम कर रही है।