दिल्ली: हेम सिंह भराना ने बैंकों को लगाया 16 हजार करोड़ का चूना, पढ़ें पूरी खबर

 हेम सिंह भराना ने बैंकों को लगाया 16 हजार करोड़ का चूना

पीएम ऑफिस द्वारा प्रवर्तन निदेशालय को भेजे गए बैंक डिटेल्स और डॉक्यूमेंट की कॉपी NDA के हाथ लगी है. इससे खुलासा हुआ है कि दिल्ली के इंडस्ट्रलिस्ट हेम सिंह भराना ने करीब सभी बड़े बैंकों को ठगा है. इसके लिए उसने एक सामान्य तरीके से बैंकों से लोन लिया, फिर पेमेंट डिफाल्ट किया और काला धन बनाया.

भराना के ऊपर आरोप है कि उसने उधार देने वाले 30 संस्थानों और लगभग तीन हजार होमबॉयर्स को 16 हजार करोड़ रुपये का धोखा दिया. बैंक डॉक्यूमेंट के अनुसार, भराना की कंपनी ने स्टॉक मार्केट में 31 मई 2016 तक 22 बैंक के 8278 करोड़ का नॉन परफॉर्मिंग एसेट की घोषणा की थी.

बता दें कि रियल इस्टेट प्रोजेक्ट में फ्रॉड के आरोप में भराना को गुड़गांव पुलिस ने जुलाई 2015 में गिरफ्तार किया था. सितंबर 2015 में उसे जमानत मिल गई थी. पीएम ऑफिस को तीन साल पहले भेजे गए एक शिकायती पत्र में बैंक और होमबॉयर्स के साथा धोखे का जिक्र है. इसमें EIEL की डायरेक्टर रेखा भराना, बिजेंदर सिंह चपनाना का भी नाम शामिल है. 

एडेल लैंडमार्क्स और अन्य सहायक कंपनियों ने वर्ष 2010 से 2013 के मध्य सामूहित निवेश योजना शुरू की. इस दौरान कंपनियों ने गुरुग्राम में जमीनें खरीदीं. उन्होंने भूमि को कई प्राइवेट, पीएसयू बैंक और यूको बैंक, विजया बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक, आएफसीआई और एसबीआई जैसे आर्थिक संस्थानों को वास्तविक मुल्य से अधिक में गिरवी रख दिया.

भराना की अचल संपत्ति सहायक कंपनियां, डेजर्ट मून रिलेटर्स प्राइवेट लिमिटेड को साल 2012 में कॉस्मस सिटी तीन लॉन्च करने का लाइसेंस मिल गया. इस दौरान प्रमोटर्स ने होमबॉयर्स को समझा दिया कि SBI सहित अन्य बैंक हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए लोन देंगी. SBI ने फर्म से टाइ-अप किया और इसके बारे में 27 जुलाई 2013 को जानकारी अपनी वेबसाइट पर लगाई. 

रिपोर्ट के अनुसार, ADEL लैंडमार्क कंपनी को मालूम था कि उन्हें इसके निर्माण के लिए जरूरी अनुमति नहीं मिली है. इस प्रोजेक्ट को डेजस्ट मून रिलेटर्स के नाम से लिया गया था, मगर मार्केटिंग ADEL लैंडमार्क्स के नाम पर हुई थी.

SBI ने भरना कॉसमस 3 प्रोजेक्ट को लोन दे दिया. लेकिन जमीन पहले ही कोलकाता की कंपनी सेरी एक्यूपमेंट फाइनेंसियल को 74 करोड़ रुपये में गिरवी पर रख दिया गया था. इसके बाद लोन में मिले पैसे को बताए गए प्रोजेक्ट में नहीं खपाया गया, बल्कि उसे EIEL में ट्रांसफर कर दिया गया.

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