नोटबंदी का लाभ: 60% बढ़ा कैशलेस ट्रांजैक्‍शन

नोटबंदी के डेढ़ साल बाद कैशलेस ट्रांजैक्‍शन में हुआ 60% का इजाफा, डेबिट-क्रेडिट कार्ड से सबसे ज्‍यादा खरीददारी

नोटबंदी को डेढ़ साल हो चुके हैं और इन डेढ़ साल के दौरान कैशलेस ट्रांजैंक्‍शन में लगभग 60 फीसदी का इजाफा हुआ है. इसमें से सबसे बड़ी हिस्‍सेदारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड से हो रही खरीददारी की  है. 

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2018 में 109 करोड़ 80 लाख इलैक्‍ट्रॉनिक पेमेंट ट्रांजैंक्‍शन हुई, जबकि नवंबर 2016 में 67 करोड़ 15 लाख ट्रांजैंक्‍शन हुई. हालांकि जनवरी 2018 में रिकॉर्ड 112 करोड़ 23 लाख ट्रांजैंक्‍शन हुई, लेकिन सरकार के लिए अच्‍छी खबर यह है कि नवंबर के बाद से लगातार इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रांजैंक्‍शन बढ़ी है, जिससे गवर्नमेंट के कैशलेस इकोनॉमी के वादे को बल मिला है. 

बता दें कि देश में कई वर्ष से प्‍लास्टिक मनी यानी डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्‍तेमाल हो रहा है, मगर नोटबंदी के बाद से इसके इस्‍तेमाल में बहुत तेजी आई है. आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कुल कैशलेस ट्रांजैंक्‍शन में 22 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी है. मार्च 2018 में जहां 109 करोड़ ऑनलाइन ट्रांजैंक्‍शन हुई, उसमें से 24 करोड़ 71 लाख ट्रांजैंक्‍शन पीओएस मशीन पर डेबिट व क्रेडिट कार्ड से हुई.

वहीं, नोटबंदी के बाद आरंभ हुए यूपीआई (यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस) के चलन का असर अब पूरी तरह से दिखने लगा है. नवंबर 2016 में जहां लगभग 3 लाख ट्रांजैंक्‍शन यूपीआई से हुई थी, मार्च 2018 में बढ़ कर 15 करोड़ 17 लाख तक पहुंच गई. 

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