मिशन 2019: सीट बंटवारे पर NDA में खींचतान शुरू, बीजेपी के लिए कम हुई सीटें

 भाजपा बिहार में लोकसभा चुनाव 2019 में 6 सीटों ही चुनाव लड़ेगी

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में देर है, लेकिन बिहार में अभी से ही सत्तारूढ़ राजग के बीच सियासी रार-तकरार शुरू हो चुकी है. राज्य में भाजपा की अगुआई वाले एनडीए का चेहरा सीएम नीतीश कुमार को बनाने को लेकर लग रहा है कि इस सत्तारूढ़ गठबंधन में सब कुछ सही नहीं है. भाजपा और जदयू दोनों खुद को बड़ा भाई  बताने में जुटी हुई है, लेकिन आंकड़ों में इसे साबित करना दोनों के लिए टेढ़ी खीर है. जेदयू की मांग और अन्य सहयोगी दलों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भाजपा के लिए केवल 6 सीटें बचती हैं, जबकि मौजूदा समय में राज्य में भाजपा के 22 सांसद हैं.

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में 40 सीटों का बंटवारा दोनों ही दलों के लिए कठिन है. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं, लेकिन एक साल बाद 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने महागठबंधन में रहते हुए अपनी पकड़ ज्यादा मजबूत कर ली. हालांकि इन दोनों ही चुनावों में भाजपा का वोट शेयर, जदयू के मुकाबले ज्यादा रहा है, लेकिन विधानसभा सीटों के आधार पर अब जदयू खुद को बड़ी पार्टी मान रही है. जदयू नेता व सीएम नीतीश कुमार ने अभी इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है. लेकिन उनकी राजनीतिक गतिविधियों को जानने वाले लोग बताते हैं कि यदि ऐसी ही स्थिति रही तो भाजपा के लिए नीतीश को साधना बड़ी चुनौती होगी.

बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं. अभी इनमें से 22 पर भाजपा, रामविलास पासवान की लोजपा के पास 6, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा के पास 3 सीटें हैं. जदयू के पास सिर्फ 2 सीटें हैं. जदयू को छोड़कर राजग के पास कुल 31 सीटें हैं. 2019 के चुनावों के संदर्भ में जदयू की मांग पर गौर करें तो जदयू 25 सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है. यानी राजग के सहयोगी दलों को बाकी 15 सीटों से ही काम चलाना होगा. ऐसे में अगर लोजपा और रालोसपा अपनी 9 सीटें न छोड़ें तो भाजपा के लिए कुल जमा 6 सीटें ही बचती हैं. इस आंकड़े पर भाजपा शायद ही राजी हो पाए. यानी ये फॉर्मूला तो लागू होने से रहा. 

भाजपा और जदयू के बीच सीटों के तालमेल के मामले पर हालिया राजनीति पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है. यहां तक कि कल पटना में इफ्तार पार्टी के समय सीएम नीतीश कुमार को राज्य में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के चेहरे के तौर पर पेश किए जाने की जदयू की मांग को लेकर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों को भी नीतीश कुमार टाल गए. नीतीश ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा, यह एक खास मौका है जब मैं सभी के चेहरे पर खुशी देखना चाहूंगा.

loading...