नाबालिग से रेप केस में आसाराम को ताउम्र कैद की सजा

 आसाराम को मिली उम्रकैद की सजा, अन्य 2 आरोपी को मिली 20-20 साल की सजा

नाबालिग शिष्या से दुष्कर्म के मामले में आसाराम (77) को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. बुधवार सुबह विशेष एससी-एसटी कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा ने सेंट्रल जेल में अदालत लगाकर अपना निर्णय सुनाया. जोधपुर की जेल में बंद आसाराम के दो सहयोगियों को भी 20-20 साज जेल की सजा हुई. फैसले और सजा के खिलाफ आसाराम राजस्थान उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है. प्रावधान उम्रकैद तक का है. 

वहीं, इंदिरा गांधी के हत्यारों, आतंकवादी अजमल आमिर कसाब और डेरा प्रमुख गुरमीत राम-रहीम के केस के बाद ये भारत का चौथा ऐसा बड़ा मामला है, जब जेल में कोर्ट लगी और वहीं से फैसला सुनाया गया. पॉक्सो एक्ट के तहत भी ये पहला बड़ा निर्णय है.

बता दें कि आसाराम के साथ शरतचंद्र और शिल्पी को भी दोषी पाएगा. शिल्पी आसाराम के लिए लड़कियों का सलेक्शन करती थी. शरतचंद्र शिल्पी और आसाराम के लिए सारी व्यवस्थाएं करता था. इसके अलावा जज ने 2 अन्य आरोपी शिवा और प्रकाश को बरी कर दिया है. इन दोनों ने पीड़ित लड़की को कार में लेकर आने-जाने का काम किया था, मगर अपराधिक मानसिकता न होने के कारण बरी किया. 

इन धाराओं के तहत हुई सजा
भारतीय दंड संहिता 506 (जान से मारने की धमकी देना), 509/34 (महिला का अपमान), 370A(नाबालिग का अपहरण) और 375C (बलात्कार) और POCSO Act (हाल ही में हुआ बदलाव) समेत दस धाराओं के तहत आसाराम दोषी करार दिया गया है. इन प्रावधानों के तहत 3 साल से लेकर 10 तक की सजा है. बलात्कार के मामले में 10 वर्ष की सजा से लकेर उम्रकैद की सजा का प्रावधान है.

उल्लेखनीय है कि आसाराम पर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की एक नाबालिग से रेप करने का आरोप है. यह लड़की मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के आश्रम में पढ़ाई कर रही थी. पीड़िता का आरोप है कि आसाराम ने जोधपुर के निकट मनई आश्रम में उसे बुलाया था और पंद्रह अगस्त 2013 में उसके साथ दुष्कर्म किया था.

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