MADHYAPRADESH: यहाँ टीचर करा रहे हैं सड़कों पर पढ़ाई, बनी है बच्चों की जान पर

VIDEO :  MP...यहाँ नहीं है बच्चों के पढ़ने के लिए स्कूल, जान पर खेल कर खेल कर रहे हैं पढ़ाई, चिंता में डूबे अभिभावक

छतरपुर.  जिले में एक बार शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल देने वाली तस्वीरें उजागर हुईं हैं. इन तस्वीरों को देखने के बाद वे सभी लोग सोचने पर मजबूर हो जायेंगे जो अपने बच्चों को लेकर चिंता में डूबे रहते हैं. इन तस्वीरों को देखने के बाद अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ाने वाला हर माता-पिता एक बार तो जरुर सोचेगा कि उनके बच्चे जिस भी स्कूल  में पढ़ रहे हैं, वो इससे तो कई बेहतर हैं.

जिले का एक और ऐसा शासकीय विद्यालय जहाँ न तो बच्चों के सिर पर  छत है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम. क्यों की यहाँ चलती सड़क पर पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे. यहाँ तेज रफ़्तार से निकलती है गाड़ियां, कभी टू व्हीलर, तो कभी थ्री व्हीलर. इतना ही नहीं कभी कुत्ते भी पढ़ते है साथ में, बच्चों के साथ कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा.

यह हाल है शहर के बार्ड नंबर-5 में लगने वाले एक शासकीय प्राइमरी स्कूल का, जहाँ 43 बच्चे और दो सहायक शिक्षक हैं. स्कूल तो शासकीय है लेकिन लगता सड़क पर है. बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी टीचर्स पर ही होती है. जब भी कोई गाड़ी तेजी से नकलती है, तो स्कूल के शिक्षकों की सांसे फूल जाती है कि कहीं बच्चों के साथ कोई हादसा न हो जाए.

दरअसल बार्ड न. 5 में RTO के पीछे लगने वाले शासकीय स्कूल में शासन ने शिक्षक तो नियुक्त कर दिए, लेकिन आज तक कोई इमारत नहीं दे पाए. जिस कारण पिछले चार सालों से यह स्कूल सड़क पर ही चल रहा है. जिला प्रशासन  की तरफ से स्कूल के लिए आज तक कोई पहल नहीं की गई. स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता का कहना है कि बच्चे स्कूल तो जाते हैं बस स्कूल नहीं है.

अब सोचने वाली बात यह है कि जब कोई प्राइवेट स्कूल को मान्यता दी जाती है, तो उसको सभी मानकों पर परखा जाता है स्कूल भवन कितना बड़ा है, प्ले ग्राऊंड है या नहीं, सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं, कितने शिक्षक हैं इत्यादि. फिर एक शासकीय स्कूल  जिसमें भवन ही नहीं है, जिला प्रशासन ने वहां स्कूल कैसे खोल दिया? 

छतरपुर से न्यू मॉर्निंग संवाददाता शुभम सोनी की रिपोर्ट.

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