भूख मिटाने के लिए मजबूरी में खाने पड़ रहे हैं चूहे, बारिश की वजह से कोसी नदी उफान पर

भूख मिटाने के लिए मजबूरी में खाने पड़ रहे हैं चूहे, बारिश की वजह से कोसी नदी उफान पर

इन दिनों बारिश के कहर से हर तरफ़ जीवन अस्त-व्यस्त है. चाहे उत्तराखंड का हाल देखिये या फिर बंगलौर का. देश का कोना-कोना पानी से भरा पड़ा है. लेकिन सबसे ज़्यादा बुरा हाल हुआ है बिहार का. नेपाल में हो रही लगातार बारिश की वजह से पानी का स्तर बाढ़ का रूप ले चुका है. यह पानी बिहार के सहरसा जिले में घुस गया है. इस जिले में कोसी नदी अपने विकराल रूप में है. यहाँ कई गाँव ऐसे हैं जो चारों तरफ़ से पानी से घिर गए हैं और जहाँ खाने के लिए कुछ भी नहीं है. ऐसे में 'बनाही' गांव के लोग जीने के लिए चूहे मारकर खा रहे हैं. जी हां, वो चूहे जिनसे लोग घृणा करते हैं वही कुछ लोगों कि भूख मिटा रहे हैं.

भूख मिटाने के लिए मजबूरी में खाने पड़ रहे हैं चूहे, बारिश की वजह से कोसी नदी उफान पर

डेढ़ सौ घर वाले इस गांव के चारों तरफ बाढ़ का पानी भरा है, जिससे बाहर से खाने का सामान लाना मुश्किल है. खेतों में भी पानी भर गया है जिस वजह से बड़ी संख्या में चूहे गांव की ऊंची जमीन पर शरण लेने पहुंच गए हैं. ऐसे में जब हर तरफ़ पानी ही पानी है तब लोगों ने समझौता कर लिया है और चूहों को अपना भोजन बना लिया है. 

भूख मिटाने के लिए मजबूरी में खाने पड़ रहे हैं चूहे, बारिश की वजह से कोसी नदी उफान पर

इसी गाँव के ही कुछ लोग दिनभर चूहे पकड़ते हैं और फिर उन्हें बेच देते हैं महंगे दामों पर. गांव के लोगों का कहना है कि कई दिन से गांव से बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं मिला. अनाज या कोई भी खाने की चीज़ हम तक पहुँच नहीं सकती. और ऐसे में भूखा नहीं रहा जाता. क्या करें मजबूरी में चूहे ही खाने पड़ रहे हैं ताकि ज़िन्दा रह सकें. पूरे का पूरा गाँव चूहे पर आश्रित है जिसकी वजह से चूहों का भी रेट बढ़ गया है. ये चूहे 40 रुपये किलो से भी ज़्यादा महंगे बिक रहे हैं.
 

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