संसद सत्र : सोनिया-राहुल का लोकतंत्र में भरोसा नहीं : भाजपा ने कसा तंज

 संसद सत्र : सोनिया-राहुल का लोकतंत्र में भरोसा नहीं : भाजपा ने कसा तंज

बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हुए सात दिन हो चुके हैं, मगर संसद में कामकाज पूरी तरह ठप है. मंगलवार को भी हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए कैंसिल की दी गई. टीडीपी जहां आंध्र प्रदेश को खास राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां पीएनबी घोटाले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में बयान देने की मांग पर अड़ी हैं. लोकसभा में 28 में से 21 बिल इस सत्र के लिए पेंडिंग हैं. बाकी 7 बिल स्थायी समितियों या संयुक्त समितियों के पास हैं. राज्यसभा में 39 बिल पेंडिंग हैं.

वहीं, संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने मंगलवार को कहा कि हमने सदन की कार्यसूची में सभी महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया है. सभी सांसदों के लिए हमने व्हिप भी जारी किया है. हम सभी पार्टियों से आग्रह करते हैं कि सदन की कार्यवाही में भाग लें और सार्थक बहस करें.

उन्होंने कहा कि हमने कांग्रेस और दूसरी पार्टियों से सदन चलाने का अनुरोध किया है. लगता है कि सोनिया और राहुल गांधी का लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है. वे संसद के बाहर तो लोकतंत्र पर खूब बातें करते हैं मगर सदन में इस पर अमल नहीं करते. कांग्रेस के जीन्स में ही लोकतंत्र नहीं है.

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि डेमोक्रेसी समाप्त करने के लिए जो करना चाहिए, वो सारे ऐसे कदम उठा रहे हैं. दूसरों को पाठ पढ़ा रहे हैं कि कांग्रेस चर्चा नहीं करना चाहती.

दोनों सदनों के सामने सरकारी कामकाज निपटाने के लिए भारी भरकम एजेंडा मौजूद है. तीन तलाक का बिल राज्यसभा में आएगा तो विपक्ष बैकफुट पर होगा. मगर जब सरकार भगोड़े आर्थिक अपराधियों की भारत में संपत्ति कुर्क करने का विधेयक लाएगी तो नीरव मोदी पर विपक्ष गवर्नमेंट को घेरेगा. एक नया बिल नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी कायम करने के लिए लाया जा रहा है.

पुराने 67 बिल संसद में जमा हो चुके हैं. इनमें से 39 बिल राज्यसभा के पास हैं. इन 39 में से 12 बिल ऐसे हैं जो लोकसभा से पारित भी हो चुके हैं.

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