पद्मावती विवाद: संसदीय समिति के सामने पेश हुए भंसाली, प्रसून जोशी

 पद्मावती विवाद: संसदीय समिति के सामने प्रसून जोशी और भंसाली ने रखा पक्ष

फिल्म 'पद्मावती' इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। पद्मावती के निदेशक संजय लीला भंसाली भी आईटी पर संसदीय समिति के सामने पेश हुए। उन्होंने फिल्म से जुड़े विवाद पर अपना पक्ष रखा। अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली इस समिति में भाजपा नेता एलके आडवाणी और कांग्रेस नेता राज बब्बर भी शामिल हैं।

इससे पहले सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी भी संसद की इन्फॉर्मेशन और टेक्नॉलजी की स्टैंडिंग कमेटी में मौजूद रहें। सूत्रों के मुताबिक जोशी ने पैनल के सदस्यों से कहा कि फिल्म को अभी मंजूरी नहीं मिली है। प्रसून आईटी की संसदीय समिति के सामने भी पेश हुए।

प्रसून ने भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता वाली लोकसभा समिति के सदस्यों से कहा कि बोर्ड ने अभी सिर्फ फिल्म के ट्रेलर और प्रोमो को मंजूरी दी है। जब एक सदस्य ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने पद्मावती देखी है। तो प्रसून ने कहा, मैंने फिल्म नहीं देखी है।

राजस्थान के दो भाजपा सांसदों सीपी जोशी और ओम बिड़ला ने फिल्म के आपत्तिजनक सामग्री पर याचिका दायर की थी। इसके बाद संसदीय समिति ने सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सेंसर बोर्ड से 30 नवंबर से पहले रिपोर्ट मांगी थी।

सूत्रों के मुताबिक संसदीय समिति के अधिकारियों ने कहा कि फिल्मों से संबंधित ज्यादातर विवाद व्यवसायिक फायदे के लिए होते हैं, पर पद्मावती के मामले में ऐसा नहीं है। ज्ञात है कि कई राजपूत संगठन और राजनेता फिल्म के निदेशक पर इतिहास से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाकर कई राज्यों में प्रदर्शन कर रहे हैं।

उनका कहना है कि फिल्म में रानी पद्मावती और सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी के बीच एक स्वप्न दृश्य है। जबकि फिल्म के निर्माता बार-बार इससे इनकार कर रहे हैं। 

30 सदस्यों के पैनल ने फिल्म के निर्माताओं के साथ सूचना-प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड के अधिकारियों को भी फिल्म के बारे में चर्चा करने के लिए बुलाया है। इस कमेटी को बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर लीड कर रहे हैं।

इससे पहले 17 नवम्बर को हुई कमिटी की बैठक में ये निर्णय लिया गया था कि फिल्म की फिल्म से जुड़ी चुनौतियों पर विचार करने के लिए इस इंडस्ट्री के लोगों को बुलाकर बात करनी चाहिए।

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