शरद यादव रह सकते हैं सरकारी बंगले में : उच्चतम न्यायालय

 अयोग्य जदयू सांसद शरद यादव को नहीं मिलेगा वेतन भत्ता, उच्चतम न्यायालय ने कहा- बंगले में रह सकते हैं

जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष और बिहार के चीफ मिनिस्टर नीतीश कुमार द्वारा पिछले साल जुलाई में राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़कर भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिलाने पर शरद यादव बागी हो गये थे. उच्चतम अदालत ने शरद यादव की सैलरी और भत्ता काट दिया है. अब शरद यादव को नहीं मिलेगी सैलरी लेकिन याचिका लंबित होने के दौरान वो सरकार बंगले में रह सकते हैं. दरअसल उच्चतम न्यायालय ने राज्य सभा से अयोग्य घोषित जदयू के बागी नेता शरद यादव की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि जदयू के पूर्व अध्यक्ष को उनकी याचिका लंबित होने के बीच सैलरी और भत्ते नहीं मिलेंगे. पर वह सरकारी बंगले में रह सकते हैं.

 न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अवकाशकालीन पीठ ने राज्य सभा में जदयू नेता रामचन्द्र प्रसाद सिंह की याचिका पर उच्च न्यायालय के पिछले साल 15 दिसंबर के आदेश में संशोधन किया.

रामचंद्र प्रसाद सिंह ने शरद यादव को वेतन भत्ते प्राप्त करने और नयी दिल्ली में सरकारी आवास में रहने की अनुमति देने के उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी. उच्च न्यायालय ने राज्य सभा के सभापति द्वारा उन्हें अयोग्य घोषित करने के निर्णय पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया था. उच्च न्यायालय ने शरद यादव द्वारा अपनी अयोग्यता को विभिन्न आधार पर चुनौती देने वाली याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया था.

यादव का कहना था कि राज्य सभा के सभापति ने चार दिसंबर को उनके और एक अन्य सासंद अली अनवर को अयोग्य घोषित करने का फैसला सुनाने से पहले अपना पक्ष रखने के लिये कोई अवसर दिया हीं नहीं. सिंह ने उच्च न्यायालय में दोनों को अयोग्य करार देने का अनुरोध करते हुये कहा था कि उन्होंने पार्टी के निर्देश का उल्लंघन करते हुये पटना में विपक्षी दलों की सभा में शिरकत की थी. 

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