भारत आने पर अटवाल ने मांगी माफी, कहा- नहीं हूं खालिस्तान समर्थक

 भारत के सख्त विरोध के बीच अटवाल ने मांगी माफी, कहा- नहीं हूं खालिस्तान समर्थक

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पिछले महीने भारत आए थे। एक डिनर में खालिस्तान समर्थक जसपाल अटवाल के शामिल होने पर विवाद हो गया था। ट्रूडो का दौरा खत्म होने के 13 दिन बाद अटवाल ने भारत और कनाडा से माफी मांगी है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा- "भारत में ट्रूडो के आधिकारिक डिनर में मेरे शामिल होने से कनाडा और भारत को जो भी परेशानी हुई उसके लिए मैं दोनों देशों से माफी चाहता हूं। मैं आतंक का समर्थन नहीं करता। मैं सिखों के लिए आजाद देश की भी वकालत नहीं करता।" बता दें कि ट्रूडो ने दिल्ली में कहा था कि अटवाल को डिनर पार्टी के लिए न्योता नहीं दिया जाना चाहिए था।

 बता दें कि अटवाल पर 1986 में भारतीय मंत्री मलकीत सिंह सिद्धू पर जानलेवा करने का आरोप लगा था। 1992 में उसे पेरोल पर रिहा किया गया था। अटवाल ने बताया कि पेरोल मिलने के बाद से ही वो इंडो-कनाडाई कम्युनिटी की तरफ से राजनीति में हिस्सा लेता रहा है।  इसके अलावा उसने कई बार भारत का दौरा भी किया। अटवाल के मुताबिक, 2017 में उसने तीन बार भारत का दौरा किया और हर बार उसे भारत सरकार ने परमिशन दी। 

अटवाल ने कहा, “कनाडा ने मेरी ट्रैवलिंग पर कोई रोक नहीं लगाई थी। इसलिए मैंने स्थानीय सांसद से ट्रूडो के डिनर में जाने की इजाजत मांगी थी।”

कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो अपनी फैमिली के साथ 17 से 24 फरवरी तक भारत के दौरे पर थे। मुंबई के एक इवेंट में अटवाल ट्रूडो की पत्नी सोफिया के साथ नजर आया। एक अन्य फोटो में वह ट्रूडो के मंत्री अमरजीत सोही के साथ भी दिखाई दिया था। तस्वीरें सामने आने पर विवाद हुआ तो कनाडा के सांसद रणदीप एस सराई ने अटवाल को मुंबई के इवेंट में बुलाने की जिम्मेदारी ली थी।

अटवाल को स्पेशल डिनर में बुलाने के विवाद पर ट्रूडो ने कहा था, हमने इस मसले को गंभीरता से लिया। उसे न्योता नहीं दिया चाहिए था। जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, कनाडा के हाईकमीशन ने इन्विटेशन रद्द कर दिया। पार्लियामेंट के एक मेंबर ने उसे पर्सनली बुलाया था। कनाडा के पीएमओ ने कहा था, यह साफ कर देना अहम है कि वह (अटवाल) पीएम (ट्रूडो) के ऑफिशियल डेलिगेशन का हिस्सा नहीं था, न ही उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन्वाइट किया था।

जसपाल अटवाल खालिस्तान समर्थक रहा है। वह बैन किए गए इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन में काम करता था। इस संगठन को 1980 के दशक की शुरुआत में कनाडा सरकार ने आतंकी संगठन घोषित किया था।अटवाल को पंजाब के पूर्व मंत्री मलकीत सिंह सिद्धू और तीन अन्य लोगों को 1986 में वैंकूवर आईलैंड में जानलेवा हमला करने के केस में दोषी ठहराया गया था। जसपाल उन चारों लोगों में शामिल था, जिन्होंने सिद्धू की कार पर घात लगाकर हमला किया था और गोलियां चलाई थीं। हालांकि, सिद्धू ने आरोपों से इनकार किया था। इसके अलावा अटवाल को 1985 में एक ऑटोमोबाइल फ्रॉड केस में भी दोषी पाया गया था।

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