Holi 2018: 1 मार्च को है होलिका दहन और यह है शुभ मुहूर्त, इस तरह करें पूजा

 Holi 2018: होली पर शुभ संयोग, तिथि और शुभ मुहूर्त

गुरुवार को होलिका दहन है. रंगों वाली होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन की पूजा होती है. ऐसी मान्‍यता है कि होलिका दहन की विधिवत पूजन से और शिव पार्वती की कथा सुनने से दांपत्‍य जीवन सुखी होता है. घर में आर्थ‍िक सबलता आती है. होली को नई फसल की शुरुआत भी मानते हैं. इसलिए होलिका दहन में अग्‍न‍ि को फसल का कुछ भाग भी चढ़ाते हैं.

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
बता दें कि इस बार होलिका दहन के दिन भद्रा लग रहा है. ऐसी मान्यता है कि भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है. इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद होलिका दहन किया जाएगा. राजधानी पंचांग के अनुसार भद्रा काल रात 7:39 बजे खत्‍म हो रहा है. इसके बाद होलिका दहन किया जा सकता है. हालांकि होलिका पूजन सुबह 10:30 के बाद कभी भी कर सकते हैं. पंडित विनोद मिश्र के अनुसार होलिका पूजन यदि वृष लग्‍न और अभिजीत लग्‍न में हो तो शुभ माना जाता है.

कैसे करें होलिका दहन की विधिवत पूजा
1. होलिका दहन जहां करना है, वहां पूर्व या उत्‍तर दिशा की ओर चेहरा कर के बैठ जाएं.

2. पूजा सामग्री के लिए अपने पास जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्‍प, कच्‍चा सूत, गुड़, साबुत हल्‍दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल आदि रखें. इसके अलावा नई फसल का कुछ हिस्‍सा गेहूं या चना की बालियां भी रखें.

3. होलिका के पास गोबर से बनी ढाल और दूसरे खिलौने रख दिए जाते हैं.

4. घर से जल, मौली, फूल, गुलाल, ढाल और खिलौनों की चार मालाएं अलग से घर से लाकर रख लें.

5. इसमें एक माला पितरों के नाम की, दूसरी हनुमानजी, तीसरी माला शीतलामाता और तीसरी माला अपने घर-परिवार के नाम की होती है.

6. होलिका की तीन या सात परिक्रमा करते हुए कच्‍चे सूत से लपेटें.

7. कच्‍चे सूत से लपेटने के बाद जल व अन्‍य पूजन सामग्री को एक-एक कर होलिका को समर्पित करें.

8. पंचोपचार विधि से होलिका का पूजन करने के बाद जल का अर्घ्‍य दें.

9. होलिका दहन के बाद उसमें कच्‍चे आम, नारियल, भुट्टे, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग अर्प‍ित किया जाता है.

10. होलिका दहन के बाद उसकी भस्‍म लाकर घर में रखना शुभ होता है.

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