2017-18 में सरकार ने जीडीपी का अनुमान घटाकर 6.5 फीसदी किया

 झटका: GDP दर घटकर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान, CSO ने जारी किया आंकड़ा

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार फिर मुश्किल में फंसती दिख रही है. वित्त वर्ष 2017-18 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.1 फीसदी थी. सीएसओ की ओर से जारी आंकड़ों में ये अनुमान जताया गया है.

इसके लिए नोटबंदी और जीएसटी भी एक कारक हो सकता है. 8 नवंबर 2016 को लागू की गई नोटबंदी के चलते अर्थव्यवस्था की गाड़ी पहले ही धीमी हो चुकी है. जीएसटी लागू होने के  बाद अर्थव्यस्था की रफ्तार में और कमी आई. इसका असर अभी भी नजर आ रहा है. 

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले साल संसद के समक्ष 2016-17 का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश कियाथा. सर्वेक्षण के मुताबिक, 2016-17 में जीडीपी की दर 7.1 प्रतिशत रही. साल 2017-18 में ये दर 6.7 से 7.5 रहने का अनुमान लगाया गया था. लेकिन नए आंकड़े कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.

पिछले साल अप्रैल से जून पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भारी गिरावट आई थी. इस दौरान जीडीपी घटकर 5.7 फीसदी तक पहुंच गई. इससे पिछले तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसदी थी. यह इसका तीन साल का निचला स्तर रहा था.

सितंबर 2016 में खत्म हुई दूसरी तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.3 फीसदी रही थी, और इसके 29.63 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया. पिछले वित्त वर्ष यानि 2015-16 की इसी अवधि के दौरान यह 25.52 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि वृद्धि दर 7.6 फीसदी थी. पहली तिमाही में जीडीपी की दर 7.1 फीसदी रही थी. सकल मूल्य वर्धन(जीवीए) के संदर्भ में -इसे अर्थव्यवस्था की हालत मापने का बेहतर पैमाना माना जाता है, क्योंकि इसमें करों और सब्सिडी को जोड़ा नहीं जाता- सितंबर में खत्म हुई तिमाही में जीवीए 27.33 लाख करोड़ रुपये रहा, जोकि 7.1 फीसदी की वृद्धि दर है और पिछले साल की समान अवधि में 7.3 फीसदी था.

loading...