दिल्ली पुलिस ने न्यू मॉर्निंग की महिला रिपोर्टर को जबरन डाला जेल में

 दिल्ली पुलिस ने न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार पर बरसाए डंडे

कहते हैं समाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए चारों स्तम्भों का ठीक ढंग से काम करना ज़रुरी होता है. सबसे ज्यादा महत्व रखता है चौथा स्तम्भ यानि मीडिया. मीडिया तभी सही ढंग से काम कर सकता है जब कानून उसका साथ दे. अगर कानून ही मीडिया के खिलाफ हो जाये तो फिर सामाजिक व्यवस्था भगवान भरोसे.

कुछ ऐसा ही हुआ को न्यू मॉर्निंग की पत्रकार प्रीती सुन्द्रियाल के साथ. मंगलापुरी इलाके में DDA पहुंचा अवैध झोपड़ियों को गिराने साथ ही पुलिस भी उनकी सुरक्षा में वहां तैनात थी. हालाँकि कोर्ट ने झुग्गियों में रहने वालों को दिवाली तक वहां रहने की इज़ाज़त दी थी. लेकिन उसके बाद भी DDA ने झुग्गियों पर बुलडोज़र चला दिया और वहां रहने वालों को बेघर कर दिया.

इतना ही नहीं लोगों के विरोध करने पर पुलिस ने उन्हें मारा-पीटा. कोर्ट के उस जगह पर स्टे ऑर्डर होने के बाद भी delhi development authority का इस तरह का कोई भी कदम उठाना असंवैधानिक और गैरकानूनी है. जब न्यू मॉर्निंग की रिपोर्टर ने इस बात को जानने के लिए लोगों से बातचीत की, तो दिल्ली पुलिस ने उसके साथ बदतमीज़ी की और उस पर डंडे बरसाए. महिला रिपोर्टर को जबरन घसीटा गया. इतना ही नहीं कुछ पुलिस वालों ने तो लात-घूसों से भी महिला पत्रकार पर वार किया और मुलजिमों की तरह ले जाकर थाने में बंद कर दिया. इसके बाद भी पुलिस अपनी दादागिरी उस महिला पत्रकार पर दिखाती रही. थाने में जाने के बाद भी उसे जानवरों की तरह मारा गया.

क़ानून की बात की जाये तो किसी महिला पर सिर्फ महिला पुलिस ही हाथ उठा सकती है वो भी उसके अपराधी होने पर. लेकिन न्यू मॉर्निंग की महिला पत्रकार को महिला और पुरुष पुलिस दोनों ने ही मारा.

पुलिस ने महिला रिपोर्टर पर दंगा भड़काने और देशद्रोह जैसे कई झूठे  आरोप भी लगाने का प्रयास किया. पुलिस ने प्रीती (पीड़ित रिपोर्टर) को झूठे आरोपों में फंसाने के लिए एक कागज़ जबरन साइन भी करवाए. जिसे उसे पढ़ने नहीं दिया गया. इन्हीं झूठे आरोपों के तहत उस पर झूठी FIR भी दर्ज कर दी गयी. पुलिस की इस हरकत से साफ़-साफ़ जाहिर है कि पुलिस इस बेक़सूर पत्रकार को अपराधी बनाने पर तुली हुई है. जानबूझ कर पुलिस प्रीती को फंसा रही है.

घटनास्थल पर लोगों ने इस बात का विरोध किया तो उन्हें भी उठाकर जबरन थाने में बंद कर दिया. एक पत्रकार का काम होता है घटना की जानकारी लेकर जनता तक पहुँचाना. ईमानदारी से काम करने पर अगर किसी मीडियाकर्मी के साथ पुलिस इस तरह का वीभत्स व्यवहार करे, तो आम लोगों के साथ पुलिस किस तरह से पेश आती होगी? यह सोचने वाली बात है.    

न्यू मॉर्निंग की पीड़ित रिपोर्टर का कहना है कि पुलिस ने उसके पेट में कई बार डंडे मारे और जबरन जीप में बैठाकर थाने ले गयी. इसके अलवा अपमानजनक शब्दों से उसे संबोधित भी किया गया.

इसी बाबत न्यू मॉर्निंग के एडिटर-इन-चीफ राज महाजन ने भी महिला पत्रकार के साथ हुई इस मारपिटाई और दुर्व्यवहार का सरासर विरोध किया है. एक पत्रकार को जो सिर्फ वहां अपना काम कर रही थी उसे जबरन अपराधी बनाये जाने को लेकर जांच की मांग की है. साथ ही पुलिस के खिलाफ भी सख्त कार्रवाही की मांग की है.  

जिस पुलिस को सामाजिक न्याय व्यवस्था बनाने की ज़िम्मेदारी दी गयी हो, वही पुलिस जनता की सुरक्षा न करके उसका शोषण करे, दबंगई दिखाए ये सरासर गलत है. इसका विरोध होना चाहिए और ऐसे पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाही की जानी चाहिए.

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