देश की पहली महिला रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने भरी सुखोई-30 से उड़ान

 सुखोई-30 लड़ाकू विमान में उड़ान भरने वाली देश की पहली महिला रक्षा मंत्री बनीं निर्मला सीतारमण

रक्षा मंत्री निर्मला सीतामरण ने जोधपुर के हवाई अड्डे से भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई 30 एमकेआई में उडान भरी. रक्षा सूत्रों के अनुसार रक्षामंत्री पायलट का जी सूट पहनकर कॉकपिट में बैठीं. सूत्रों के अनुसार वह अभियान की तैयारियों और युद्धक क्षमताओं की समीक्षा कर रहीं हैं. सुखोई-30 एमकेआई परमाणु सक्षम विमान है, जो दुश्मन के क्षेत्र में अंदर तक घुस सकता है.

सुखोई में उड़ान भरने के बाद निर्मला सीतारमण लड़ाकू विमान से उड़ान भरने वाली देश की पहली रक्षा मंत्री बन गई हैं. इससे पहले 25 नवंबर 2009 में तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर के तौर पर पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल पुणे में सुखोई में उड़ान भर चुकी हैं. सुखोई वायुसेना का सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान है.

सुखोई उड़ान से जुड़े अपने अनुभव को निर्मला सीतारमण ने मीडिया से शेयर किया और काफी उत्साहित दिखीं. उन्होंने कहा सुखोई उड़ाना मेरे लिए गर्व की बात है. सुखोई उड़ाकर मैं ये समझ पाई कि इसे उड़ाने के लिए कितनी रिगरस प्रैक्टिस की जरूरत होती है और हम कितनी जल्दी हर सिचुएशन के लिए तैयार है और कितनी जल्दी मैदान में उतरने के लिए तैयार रहते हैं. आज सुखोई उड़ाना आंख खोलने वाला और यादगार मोमेंट रहा. 

इससे पहले, हाल में सीतारमण ने गोवा में देश के सबसे बड़े नौसैनिक युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य को मॉनिटर किया था. निर्मला सीतारमण ने ऐसा सेना के अलग अलग अंगों की कार्यप्रणाली और तैयारियों को समझने के लिए किया था.

बता दें कि रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण सेना के तीनों विंग्स का हौसला बढ़ाती रहती हैं. इससे पहले रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण इसी महीने ‘रक्षामंत्री डे एट सी’ अभियान में हिस्सा लेने के लिए गोवा के भारतीय नौसेना अड्डा आईएनएस पहुंची थीं. बता दें कि सरकार ने 3547 करोड़ रुपये की लागत से असॉल्ट राइफलों और कार्बाइन की खरीद के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी, ताकि सीमा पर तैनात सैनिकों की तात्कालिक जरूरत की ‘त्वरित आधार’ पर पूर्ति की जा सके.

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाले रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने 72000 असॉल्ट राइफल और 93 हजार 895 कार्बाइन की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इस खरीद से सशस्त्र बलों के लिये छोटे हथियारों की कमी का समाधान होने की उम्मीद है.

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